ZIAUDDIN

ZIAUDDIN

Search This Blog

Wednesday, January 12, 2011

अपने आप को कैसे बदले ?

हम ज्ञान एवं विचार द्वारा  बिलकुल ही नही बदलते है। अनुभव द्वारा ही हम बदलते हैं।

विचारों में जीना छोड़ों । विचार आपको उधार जीना सीखाते हैं । विचार दूसरांे से ग्रहण किये होते हैं जो प्राप्त होते हैं । अतः विचारों में जीना छोड़ों । अनुभव को प्रधानता दों । अनुभव का एक कण ज्ञान के टन से बहुत भारी होता हैं ।

मन आधारित जीवन न जीकर अनुभव आधारित जीवन जीए । मन का प्रमुख कार्य सोचना, निर्णय करना, तुलना करना, न्यायोचित ठहराना एवं तादत्म्य बिठाना हैं । अतः इन पांचों कार्यो की तुलना में अपने अनुभव को प्राथमिकता दो । कई बार अनुभव के उपरान्त भी आपकी शंका बनी रहती हैं तो उसे छोड़ों । बुद्धि के आधार पर अनुभव को उपेक्षित मत करों । अनुभव से ही जीवन में रूपान्तरण सम्भव हैं ।
परिवर्तन एक मानसिक क्रिया नहीं हैं । अनुभवों के प्रति साक्षी होना ही सच में बुद्धिमान अर्थात् प्रज्ञावान होना हैं । जब हम अनुभव करते है तब स्व में होते हैं जब चर्चा करते हैं तब स्व से दूर होते हैं । प्रतिक्रिया करना स्व को खोना हैं ।
मस्तिष्क की संरचना कुछ इस प्रकार की है कि हम अनुभव से ही बदल पाते हैं ।

सूचनात्मक ज्ञान एवं स्मृति हमें रूपान्तरित करने में असमर्थ हैं। वर्तमान की सारी शिक्षा सूचनात्मक ज्ञान बढ़ाती हैं । तभी तो राजस्थानी में कहा गया है कि ’’भण्या घणा पण गण्या नहीं ’’ इसका अर्थ है कि शिक्षा तो बहुत प्राप्त की लेकिन अनुभव शून्य हैं ।

"जियाउददीन"

Tuesday, January 11, 2011

सुपर किड बनने के दवाब से बच्चों में बढ़ती खुदकुशी

बच्चों को सुपर किड बनाने की अभिभावकों एवं शिक्षकों की जिद्द देश के भावी कर्णधारों को मानसिक बीमारियों का शिकार बना रही है और जिसके कारण बच्चों में खुदकुशी की घटनायें बढ़ रही हैं।
आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के बढ़ने के कारण हमारे देश में वैसे तो हर उम्र के लोगों में खुदकुशी की घटनायें बढ़ी है लेकिन छात्रों में खुदकुशी की दर कहीं अधिक तेजी से बढ़ी है और इसका मुख्य कारण उन पर परिवार एवं स्कूल का बढ़ता दवाब है।

आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षो में 15 से 24 साल के युवाओं में आत्महत्या के मामले 200 प्रतिशत तक बढ़े हैं। एक अनुमान के अनुसार सिर्फ दिल्ली में ही प्रतिमाह चार से ज्यादा बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं।
इंडियन एसोसिएशन आफ बायो-साइकिएट्री के अध्यक्ष तथा नयी दिल्ली में जनवरी में आयोजित हो रहे इंडियन साइकियेट्रिक सोसायटी के 63 वें राश्ट्रीय सम्मेलन के अध्यक्ष डा. नीलम कुमार बोहरा ने कहा कि आज के समय में छात्रों में बढ़ रहे मानसिक तनाव एवं मानसिक रोग भी आत्महत्या में बढोतरी के कारण हैं। यह पाया गया है कि मानसिक समस्याओं से परेशान 25 फीसदी लोगों के दिमाग में आत्महत्या का ख्याल आता है। उनके पास काउंसलिंग के लिए आने वाले लोगों में 25 प्रतिशत लोग आत्महत्या करने की बात कहते हैं लेकिन इस तरह की बातें करने वाले लोगों को परिवार के भरपूर सहयोग और उचित सलाह से ऐसा करने से रोका जा सकता है।

दिल्ली कास्मोस इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड बिहैवियरल साइंसेस तथा दिल्ली साइकियेट्रिक सेंटर के प्रमुख डा. सुनील मित्तल बताते हैं कि आत्महत्या के मामले बढ़ने का मुख्य कारण परिवार, समाज या कार्यक्षेत्र से जुड़ा तनाव होता है। वहीं युवाओं में यह प्रवृत्ति बढ़ने की वजह तनाव न सह पाना है। युवाओं में आत्महत्या की एक बड़ी वजह स्कूल और परिवार का दबाव है।

अध्ययनों से पता चला है कि 15 वर्ष से कम उम्र के एक लाख बच्चों में 1 या 2 बच्चे और 14 से 19 वर्ष आयु के एक लाख बच्चों में 11-12 बच्चे आत्महत्या करते हैं। जबकि 10 से 14 वर्ष आयु के बच्चों में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या ही है। आत्महत्या के असफल प्रयास के आंकड़े तो और भी ज्यादा हैं। आत्महत्या का प्रयास करने वाले 2 प्रतिशत बच्चों की पहले प्रयास में ही मौत हो जाती है, जबकि 4 प्रतिशत बच्चों की कई बार प्रयास करने के बाद मौत होती है।
डा. सुनील मित्तल बताते हैं कि आज अभिभावक अपने बच्चों को लेकर महत्वाकांक्षी हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनका बच्चा रातों रात सुपर स्टार बन जाए लेकिन इस दबाव से बचपन खोता जा रहा है। अभिभावक अपने अधूरे सपनों को बच्चों के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं और वे बच्चों पर इतने दवाब लाद देते हैं कि बच्चे मानसिक तौर पर टूट जाते हैं और वे घोर तनाव तथा डिप्रेशन से घिर जाते हैं और इसकी परिणति आत्महत्या के रूप में होती है।

दिल्ली साइकियेट्रिक सोसायटी पूर्व अध्यक्ष डा. बोहरा कहते हैं कि बच्चे मुख्य तौर पर जिन कारणों से आत्महत्या के लिये अधिक प्रेरित हो रहे हैं उनमें बच्चों पर बढ़ते दवाब, उनमें बढ़ता एकाकीपन और प्रतिस्पर्धाओं में पिछड़ने की आशंका प्रमुख हैं। पिछले कुछ समय में आर्थिक कारणों से अधिक से अधिक संख्या में महिलायें नौकरी-रोजगार के कारण ज्यादातर समय घर से बाहर रहने लगी हैं जिसके कारण बच्चों में एकाकीपन बढ़ गया है। माता-पिता की व्यस्तता तथा अन्य कारणों से बच्चों एवं माता-पिता के बीच संवादहीनता की स्थिति बढ़ रही है। इसके कारण न तो बच्चे अपने मन की बात को माता-पिता को बता पाते हैं और न ही माता-पिता के पास अपने बच्चों के मन को समझने के लिये समय बचा है। इस कारण बच्चे अकेले हो जाते हैं। दूसरी तरफ माता-पिता की अपने बच्चों से उम्मीदें इतनी बढ़ गयी है कि औसत दर्जे के बच्चे इस अपराध बोझ से ग्रस्त रहते हैं कि वे अपनी मां-बाप की उम्मीदें पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

हमारे देश में आत्महत्या की प्रवृति न केवल बच्चों में बल्कि हर उम्र के लोगों में बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रेकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि भारत में आत्महत्या की जितनी घटनाएं होती हैं उनमें से 7 प्रतिशत घटनायें मानसिक बीमारियों के कारण होती है और 23.8 प्रतिशत आत्महत्यायें पारिवारिक कारणों से होती है।
आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल एक लाख लोग खुदकुशी कर लेते हैं। दुनिया में जितनी आत्महत्यायें होती हैं उनमें से 10 प्रतिशत आत्महत्यायें भारत में होती हैं। भारत में पिछले कुछ वर्षों से आत्महत्या की दर में तेजी से वृद्धि हुई है। यहां सन् 2006 में प्रति एक लाख लोगों में 10.5 लोगों में आत्महत्या के मामले दर्ज हुए जो 1980 से 67 प्रतिशत अधिक था। अधिकतर आत्महत्या पुरुषों और युवा उम्र के लोगों के द्वारा की जाती है।
डा. बोहरा बताते हैं कि करीब 80 प्रतिशत आत्महत्यायें पूर्व संकेत के बाद होती हैं। कुछ आत्महत्यायें क्षणिक आवेग में भी होती हैं किंतु अधिकतर आत्महत्यायें एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम होती हैं। व्यक्ति आम तौर पर जीवन में मोड़ दर मोड़ आने वाली विभिन्न समस्याओं, बाधाओं और परेशानियों से जूझने की कोशिश करता है, लेकिन जब वह इन पर काबू पाने में असफल हो जाता है तब उसके मन में निराशा और हताशा की भावना आती है। ऐसा भी होता है कि व्यक्ति इन समस्याओं से निजात पाने के लिए और अन्य लोगों का ध्यान अपनी कमजोर स्थिति की ओर खींचने के लिए आत्महत्या का असफल प्रयास किया हो। उनकी यह सोचकर अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि उन्होंने आवेग में आकर या भूलवश ऐसा किया होगा बल्कि उनकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान करने की कोशिश की जानी चाहिए।

आत्महत्या करने वालों में ज्यादातर डिप्रेशन, खास तौर पर सायकोटिक डिप्रेशन के शिकार होते हैं। इनके मन में हर समय एक किस्म का अपराध बोध मौजूद होता है, जो पूरी तरह कृत्रिम और गलत होता है। किसी भी गलत काम या दुखद घटना के लिये वे अपने आप को जिम्मेदार मान लेते हैं। हर आत्महत्या तीव्र निराशा और अवसाद (डिप्रेशन) की चरम परिणति है। इसलिए आत्महत्या की स्थिति से बचने के लिए डिप्रेशन से बचना और उसका इलाज कराना जरूरी है।





"जियाउददीन"

Monday, January 10, 2011

Atal Vaj - अटल व्यथा

भाजपा एक्सप्रेस भारत प्लैटफॉर्म पर लगी और उसकी रवानगी भी हो गई। इन सारे वर्षों में और हालिया घटनाक्रम से यह बात कभी भी पल्ले नहीं पड़ी कि आखिर वाजपेयी को गले लगाए रखने की भाजपाई मजबूरी क्या है। वैंकैया ने सीधे कह दिया कि व्यक्ति आधारित राजनीति अब नहीं होगी, मोदी बने रहेंगे, फिर अगले ही पल वाजपेयी की मनौव्वल में जुट गए।

दरअसल सोनिया के नाम पर व्यक्तिवाद का विरोध कर अपने बाल नोंचने वाले भाजपाई स्वयं पीछे रहते तो आज पार्टी कार्यकर्ताओं की रज़ामंदी के खिलाफ जाकर उमा भारती और वसुंधरा राजे की ताज़पोशी न हो पाती। सारे वाकये पर कविह्रदयी पूर्व प्रधानमंत्री (जिन्होनें “थाली का बैंगन” मुहावरे को पहले भी चरितार्थ किया है) ने कराह कर कहा “बस और नहीं” पर फिर पहले का कहा मज़ाक में टाल गए। इधर भाजपा का भावी चरित्र कैसा होगा यह तय कर पाना उतना ही दुष्कर होता जा रहा है जितना कि पुर्वानुमान लगाना कि इस साल मॉनसून कैसा रहेगा।


बहरहाल जैसा कि मेरा पुर्वानुमान था, वाजपेयी जी का युग और भाजपा की उदार छवि दोनों ही भूतकाल की बातें हो जाने वाली हैं। पत्रकार कमलेश्रर ने सही कहा है, “वाजपेयी का सैधान्तिक निर्गम हो चुका है”। ऐसे में उग्र हिंदू छवि वाले नेताओं के तो वारे न्यारे होंगे पर कमोबेश तटस्थ छवि वाली जमात का क्या होगा, राम जाने! संघ पहले ही कह चुका है कि “चीते का दाग छोड़ देना” भूल थी। इसलिए “तिल गुड़” फैक्टर को तिलांजली दे कर राम फिर याद आने लगे हैं। मुझे डर है कि अपने दाग वापस पाने की फिराक़ में यह घायल चीता कहीं आदमखोर न हो जाए।


"जियाउददीन"

Sunday, January 9, 2011

Sallu-Kat are still friends

Salman Khan and Katrina Kaif
Salman Khan and Katrina Kaif
Katrina Kaif and Salman Khan’s split tale might have done the rounds worldwide but the two still remain good friends as per the reports. This is why Katrina Kaif was spotted visiting Salman Khan to wish him for his birthday, two days in advance which was on December 27. Salman Khan went to Dubai to celebrate his birthday with family members.
His ex-girlfriend Katrina took out time from her shooting schedule to wish him before he went for the trip. Well Katrina was also spotted on Bigg Boss Season 4 to promote her film Tees Maar Khan . She was sporting enough to smile while Salman joked about Ranbir Kapoor on the show.
Bollywood director Rajkumar Santoshi thought of approaching his hit romantic comedy, Ajab Prem Ki Ghazab Kahani, pair Ranbir Kapoor and Katrina Kaif. The filmmaker approached the stars of the movie with a script to make a sequel, calling it “Ajab Haseena Ghajab Deewana”. But Kat refused to do the film.
Know more about your favourite celebrities. Read Salman Khan horoscope.

ZIAUDDIN

Friday, January 7, 2011

सलमान ने असिन से रचाई शादी!

सलमान ने असिन से रचाई शादी!
मुंबई ,सलमान खान ने असिन को अपनी दुल्हन बना लिया है।
मीडिया रिपोर्ट का दावा है कि अभिनेत्री ने इसी सप्ताह अपने करीबी दोस्तों की मौजूदगी में सलमान से शादी कर ली है।
चर्चा है कि शादी में असिन के माता-पिता शामिल नहीं हुए। असिन ने भी सलमान के साथ शादी की अफवाह को सच बताया है, लेकिन उन्होंने ये शादी एक फिल्म के लिए की है। दरअसल, अनीज बज्मी की फिल्म रेडी के लिए इस शादी की शूटिंग की गई है। यह शादी पंजाबी रीति-रिवाज से की गई। केरल के एक स्थानीय अखबार ने असिन और सलमान की शादी की खबर फोटो के साथ प्रकाशित कर दी।
Asin, Salman 'Marriage' Buzzes South' - Bollywood3इसके बाद असिन के पास उनके प्रशंसकों और रिश्तेदारों की बधाइयों को तांता लग गया। सभी को आश्चर्य था कि इस अभिनेत्री ने इतनी बड़ी बात सबसे छिपाई रखी।असिन ने कहा, 'मैंने इस अफवाह का भरपूर मजा लिया। मैं एक हफ्ते से दुल्हन के रूप में सात फेरे लेने की खबर पढ़ रही हूं।'
सलमान को जब यह बात पता चली तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने इसे मजाक में उड़ा दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने इसके पहले मलयाली, तमिल और तेलुगु रीति रिवाज से पर्दे पर कई शादियां की हैं लेकिन पहली बार पंजाबी रीति से की।' यह फिल्म अगले साल 27 मई को रिलीज हो रही है।
"जियाउददीन"